Friday, June 28, 2019

काश




मै रूट जाती तो मानते तुम ,
कभी यूँ भी साथ निभाते तुम। 

जिन्दगी के गणित में उलछ गए थे जब हम ,
तब मेरा विश्वास जागते तुम।

ना जाने कितना कुछ था  कहने को,
काश बिना शब्दों के समझ पाते तुम। 

आपने ही अंधेरो में गुम हो गयी हूँ मै ,
कभी तो अहसासों के गर्त में जाते तुम। 

हार गयी थी मै लड़ते लड़ते अकेले ज़माने से ,
एक बार तो मेरा हौसला बढ़ाते तुम। 

सही गलत की समझ थी मुझको भी ,
पर कभी तो बेपरवाह सा पल विताते तुम। 

जानती हु सब परियों की कहानियाँ है झूटी ,
पर कभी तो राक्षस की कैद से छुड़वाते तुम। 

आम लोगो सी आम जिंदगानी हमारी ,
पर कभी तो खास महसूस करते तुम। 

सपनो की दुनियाँ में ले जाते तुम ,
कभी मुझको भी समझ पाते तुम। 





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