Kahne ko bahut kuch hai !!!
Sunday, June 30, 2019
तन्हाई
जब दोपहर को
समुन्द्र की लहरें ,
मेरे हृदय की धड़कनों के ,
समरस हो कर उठती हैं।
तो सूरज की प्राणदायनी किरणों से ,
मुझे ,
तेरी जुदाई
बर्दाश्त करने की
शक्ति मिलती है।
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काश
काश मैं गुलाब बन पाती
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